हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर में धार्मिक नेताओं की दूसरी अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित हुई। इसमें इस्लामी गणराज्य ईरान, रूस और विभिन्न देशों के धार्मिक नेताओं, उलेमा और प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। बैठक में इस्लामी और धार्मिक मूल्यों की रक्षा, मानव गरिमा और न्याय, धर्मों के बीच एकता, वैश्विक नैतिक संकट तथा फिलिस्तीन और ग़ज़ा में ज़ायोनी शासन के जारी अपराधों सहित महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक को रूस में इस्लामी गणराज्य ईरान के राजदूत डॉ. काज़िम जलाली और विश्व सभा-ए-तक़रीब-ए-मज़ाहिब-ए-इस्लामी के महासचिव हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉ. हमीद शहरीयारी ने संबोधित किया और ईरान का पक्ष स्पष्ट किया।

हमीद शहरीयारी: मानव गरिमा और न्याय इस्लामी व्यवस्था के मूल मूल्य हैं
विश्व सभा-ए-तक़रीब-ए-मज़ाहिब-ए-इस्लामी के महासचिव हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉ. हमीद शहरीयारी ने अपने संबोधन में वर्तमान वैश्विक संकटों की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस संकट के दौर में दो मूल इस्लामी मूल्यों, यानी गरिमा और न्याय पर ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि गरिमा एक मानवीय मूल्य है, जिसे अल्लाह ने सभी इंसानों को प्रदान किया है और इसका संबंध किसी विशेष धर्म, मज़हब या विश्वास से नहीं है। कुरआन में कहा गया है: “और निश्चय ही हमने आदम की संतान को सम्मान प्रदान किया।”
उन्होंने न्याय को दूसरे इंसान के अधिकार का सम्मान करना बताते हुए कहा कि यह सर्वोच्च और स्वीकार्य सामाजिक मूल्यों में से एक है, जबकि अत्याचार का अर्थ दूसरे इंसान के अधिकार को ज़बरदस्ती और दुश्मनी के माध्यम से छीनना है।
इंसान के मूल अधिकारों का सम्मान सभी पर आवश्यक है
डॉ. शहरीयारी ने मानवाधिकारों की ओर संकेत करते हुए कहा कि हर इंसान को जीवन, भोजन, पानी, अपने देश में रहने और स्वतंत्रता जैसे बुनियादी अधिकार प्राप्त हैं और इन अधिकारों का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि किसी इंसान को अन्यायपूर्ण तरीके से मारना, उसे घेराबंदी में रखना तथा भोजन, पानी, आवास और अपने देश में रहने के अधिकार से वंचित करना किसी के लिए उचित नहीं है। ये वे मानवीय सिद्धांत हैं जिनका कुरआन आदेश देता है और मुसलमानों के लिए आवश्यक है कि सामने वाले के धर्म, मज़हब और विचारधारा से अलग इन सिद्धांतों का सम्मान करें।

फिलिस्तीनियों के अधिकारों का उल्लंघन वैश्विक नैतिक संकट का स्पष्ट उदाहरण है
विश्व सभा-ए-तक़रीब के महासचिव ने दुनिया में नैतिक मूल्यों के सामने मौजूद व्यापक चुनौतियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि आज इन्हीं मूल अधिकारों से फिलिस्तीनी जनता को वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जीवन का अधिकार बुनियादी मानवाधिकारों में सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन फिलिस्तीनी जनता कई दशकों से अत्याचार, जबरन विस्थापन और वंचित किए जाने का सामना कर रही है।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन शहरीयारी ने कहा कि अमेरिका, वर्चस्ववादी व्यवस्था और ज़ायोनी शासन के समर्थन से फिलिस्तीन के एक हिस्से पर कब्जा किया गया तथा फिलिस्तीनी जनता को उनकी मातृभूमि से बेदखल करके उनके घरों को नष्ट और उनकी संपत्ति को लूट लिया गया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें उनके बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी जनता के जबरन विस्थापन का सिलसिला कई पीढ़ियों से जारी है और आज ग़ज़ा में लाखों फिलिस्तीनी बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं। वहीं हजारों आम नागरिक, विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे, ज़ायोनी हमलों का निशाना बन चुके हैं।
ग़ज़ा और लेबनान में ज़ायोनी अपराध नरसंहार और सामूहिक हत्या हैं
डॉ. शहरीयारी ने ग़ज़ा, लेबनान और अन्य इस्लामी देशों में ज़ायोनी शासन की कार्रवाइयों को नरसंहार और सामूहिक हत्या बताते हुए कहा कि ये अपराध मानवाधिकारों का दावा करने वाली वैश्विक व्यवस्था के दोहरे मापदंड को उजागर करते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर निर्दोष लोगों की हत्या गलत है तो हर जगह गलत होनी चाहिए और अगर लोगों को उनकी मातृभूमि से बेदखल करना गलत है तो हर जगह गलत होना चाहिए। लेकिन अफसोस की बात है कि ज़ायोनी शासन बच्चों और महिलाओं की हत्या को “न्यायपूर्ण युद्ध” और मानवाधिकारों की रक्षा को “आतंकवाद” बताता है।

काज़िम जलाली: हमें अत्याचार और अन्याय के खिलाफ खड़ा होना होगा
रूस में ईरान के राजदूत डॉ. काज़िम जलाली ने बैठक को संबोधित करते हुए सेंट पीटर्सबर्ग के ऐतिहासिक महत्व और प्रतिरोध की भावना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वे ऐसी धरती का प्रतिनिधित्व करते हैं जो अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता के सामने प्रतिरोध कर रही है और इस संघर्ष में सफल हुई है।
उन्होंने वर्तमान दौर में धार्मिक और पारंपरिक मूल्यों के कमजोर होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज हमें यह सोचने की आवश्यकता है कि हम धर्म के केवल बाहरी पहलुओं पर ध्यान दे रहे हैं या उसके वास्तविक और मूल संदेश को भी समझ रहे हैं।
ईरानी राजदूत ने कहा कि हमें यह सवाल भी करना चाहिए कि फिलिस्तीन में हजारों लोगों की हत्या और ग़ज़ा में महिलाओं और बच्चों की हत्या ने क्या उलेमा और बुद्धिजीवियों को जागरूक किया है? इसी तरह मिनाब में बच्चों की हत्या और अमेरिका के हालिया हमलों ने क्या हमें धर्म के वास्तविक सार की ओर ध्यान दिलाया है?
उन्होंने कहा कि हम सभी धार्मिक कट्टरता का विरोध करने की बात करते हैं, लेकिन यदि उलेमा अत्याचार और शैतानी शक्तियों के खिलाफ संघर्ष की बात न करें तो क्या इससे कट्टरता के बढ़ने का रास्ता आसान नहीं होगा?
डॉ. जलाली ने ज़ायोनीवाद के उद्देश्यों की ओर संकेत करते हुए कहा कि ज़ायोनीवाद मुसलमानों, ईसाइयों और वास्तविक यहूदियों के लिए भी योजनाएं बना रहा है और आधुनिक तथा उन्नत साधनों का इस्तेमाल करके धार्मिक और मानवीय परंपराओं, नैतिकता और न्याय को निशाना बना रहा है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका आज फिरऔनी रवैये के साथ सभी ईश्वरीय धर्मों के अनुयायियों के सामने खड़ा है, जबकि ईश्वरीय पैगंबर हमेशा अत्याचार के खिलाफ खड़े रहे हैं। इसलिए हमें भी अत्याचार और अन्याय के खिलाफ खड़ा होना होगा, जिसका वर्तमान दौर में प्रमुख उदाहरण अमेरिका है।
रूसी धार्मिक नेताओं ने धार्मिक और नैतिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया
बैठक की शुरुआत में सेंट पीटर्सबर्ग के गवर्नर अलेक्जेंडर बेग्लोव ने मेहमानों का स्वागत किया और शहर में विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के बीच एकता और सद्भाव पर संतोष व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि रूस में युवाओं की क्षमताओं को विकसित करने के लिए विभिन्न नीतियां, कानून और योजनाएं धार्मिक और आध्यात्मिक मूल्यों के आधार पर बनाई गई हैं। यह बैठक विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के बीच निकटता तथा जनता की एकता के लिए एक उपयुक्त अवसर है।
सेंट पीटर्सबर्ग के ऑर्थोडॉक्स बिशप ने भी बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में नैतिक सिद्धांतों की अनदेखी की जा रही है। इसलिए धार्मिक और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना हमारी मूल जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आस्था इंसान को चिंतन और विचार करने का निमंत्रण देती है और हम आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदार हैं। सेंट पीटर्सबर्ग सदियों से विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के बीच एकता और अच्छे सह-अस्तित्व का केंद्र रहा है।
रूसी मुस्लिम परिषद के प्रमुख अल्बर गुरकानोव ने भी बैठक को संबोधित करते हुए धार्मिक और पारंपरिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यही मूल्य समाज और संस्कृति को मुक्ति की दिशा में ले जाने की क्षमता रखते हैं।
उन्होंने पश्चिमी सभ्यता के भौतिकवादी दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि आज केवल उलेमा ही नहीं, बल्कि दुनिया के सभी ईश्वर में विश्वास रखने वाले लोगों को एकजुट होने की आवश्यकता है, ताकि कट्टर भौतिकवाद के खिलाफ सफलता हासिल की जा सके।
उन्होंने कहा कि आज आध्यात्मिकता की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संघर्ष जारी है और हमें पश्चिमी तथा भौतिकवादी प्रभावों के सामने प्रतिरोध करते हुए अपने धार्मिक, मानवीय और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा करनी होगी।
ईरान और रूस के संबंधों के विस्तार पर भी संतोष व्यक्त किया गया
डॉ. काज़िम जलाली ने अपने संबोधन के अंत में ईरान और रूस के बीच संबंधों के विस्तार पर संतोष व्यक्त किया।
बैठक के दौरान इस्लामी संस्कृति और संचार संगठन के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मोहम्मद मेहदी ईमानीपुर का संदेश भी प्रस्तुत किया गया, जिसे सेंट पीटर्सबर्ग के मुख्य मुफ्ती रावील पंजायेव को सौंपा गया।
धार्मिक नेताओं की इस अंतरराष्ट्रीय बैठक में वक्ताओं ने जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक संकटों और नैतिक चुनौतियों का सामना धार्मिक और मानवीय मूल्यों, न्याय, गरिमा, आपसी सम्मान तथा विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के बीच एकता को मजबूत करके किया जा सकता है। साथ ही फिलिस्तीन और ग़ज़ा में जारी मानवीय त्रासदी को समाप्त करने और फिलिस्तीनी जनता के बुनियादी अधिकारों के समर्थन को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी बताया गया।
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